"सन फ्रांसिस्को से आई अर्चना पांडा की आवाज़ एक विद्रोह है " - पद्म विभूषण गोपाल दस नीरज जी ।

"आज अर्चना पांडा की कविता सुन कर आँखों में आंसू आ गए .. यही है कविता की आज की वाचिक परंपरा ..." सुप्रसिद्ध कवि उदय प्रताप सिंह जी ।

दैनिक भास्कर - "अर्चना पांडा की कविता ने पूरे सदन को मंत्र मुग्ध कर दिया" ।

अमर उजाला - "अंतर रास्ट्रीय कवि सम्मलेन समारोह के आरम्भ में सेन फ्रांसिस्को से आई अर्चना पांडा ने सुन्दर कविता पाठ किया" ।

 

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